ज़िंदगी में दर्द नहीं, बस थोड़ा संघर्ष है,
चेहरे पर मायूसी और कंधों पर ज़िम्मेदारी लेकर,
ख़ामोश हौसलों के साथ,
हर सुबह जीत की राह पर मैं निकल पड़ता हूँ।
चंद पैसों के लिए अपना समय और हुनर बेचता हूँ,
दूसरों के सपने पूरे कर, अपने भीतर उन्हें सींचता हूँ,
फिर शाम ढले, जब शहर थक कर सो जाता है,
मैं किताबों में अपने सपनों को चुपचाप टटोलता हूँ।
- चेतन मौर्य

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